🌺सहस्रमहावास्तू🌺 वास्तुकथा१: जब भवनमें और जन्मपत्री दोनों जगह पर निर्बल-अग्नीकी बाधा दिखायी देती है तथा ऐसे भवनमें जातक अनेक बरस रहता है;तब उसके जहनमें इस निर्बल अग्नीका दोष और ज़हर फैलता जाता है।ऐसी स्थितीमें इस जातकने दीर्घ समय के लिये आयुर्वेदिक और यौगिक उपचार लेनेसे दोष और जहरका परिहार हो सकता है।इस प्रकारसे अंत:करण चतुष्टय की संशुध्दी करनेके पश्चात् ही वास्तुमें किये गुणोत्कर्ष का पूरा पूरा लाभ हो सकता है।कपालभाती-भस्रिकाप्राणायामसे मन-चित्त-बुध्दी-अहंकारमें अग्नीका समुचित स्वरूप उदित हो जाता है।यह अग्नीका सूक्ष्म स्पंदन संशुध्दीके साथ चेतना प्रदान करता है।श्वासकी गती के साथ “ह्रीम् “मंत्रबीजके जापसे श्वासोंमें प्राणशक्तीका संचार हो जाता है और जिसके ज़रिए नाभीस्थानके सूर्य तत्वका जागरण हो जाता है।समंत्र सूर्यनमस्कार प्रतिदिन आचरित करनेसे शरीरमें ग्रंथियोंमें रसवृध्दीका अनुभव होता है।आयुर्वेदिक नाभीचिकित्सा करनेसे अग्नीतत्वके स्पंदनोंमें लाभदायक वृध्दी हो जाती है। 🌈डॉ नरेंद्र सहस्रबुध्दे 9822011050🌺5


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